ईरान में हिंसक प्रदर्शन तेज, इंटरनेट बंद, 62 की मौत | Iran Protest Breaking News
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ईरान में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं बंद.
विरोध प्रदर्शनों में 62 लोगों की मौत.
सरकार ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप.
Iran / लगातार भड़कते विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए देशभर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और अंतर्राष्ट्रीय टेलीफोन कॉल पर भी रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों का गुस्सा कम होता नहीं दिख रहा। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों से सामने आए वीडियो में सड़कों पर मलबा बिखरा हुआ है, जगह-जगह आग जलाई जा रही है और लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं।
इन प्रदर्शनों के बीच मौतों का आंकड़ा बढ़कर 62 तक पहुंच गया है। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने हताहतों की संख्या और हालात को लेकर अब तक विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। शुक्रवार को सरकारी मीडिया ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आरोप लगाया कि हिंसा भड़काने के पीछे अमेरिका और इजरायल से जुड़े “आतंकवादी एजेंटों” की भूमिका है। सरकारी बयान में कहा गया कि आगजनी और अराजकता सुनियोजित तरीके से फैलाई गई, हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।
इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर एक संक्षिप्त संबोधन दिया। अपने बयान में उन्होंने साफ संकेत दिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। खामेनेई ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लेते हुए कहा कि कुछ लोग “दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं।” उनके इस बयान के दौरान भी कई इलाकों में लोग “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाते नजर आए।
ईरान में यह विरोध प्रदर्शन पिछले साल 28 दिसंबर से शुरू हुए थे और समय के साथ इनकी तीव्रता लगातार बढ़ती गई है। शुरुआती दौर में यह प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों और महंगाई के खिलाफ थे, लेकिन धीरे-धीरे यह सरकार और पूरे इस्लामी शासन व्यवस्था के खिलाफ असंतोष में बदलते चले गए। मौजूदा हालात को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इन प्रदर्शनों का एक अहम मोड़ युवराज रजा पहलवी के आह्वान के बाद आया। पहलवी, जिनके पिता शाह मोहम्मद रजा पहलवी 1979 की क्रांति से पहले देश छोड़कर भाग गए थे, ने गुरुवार रात और फिर शुक्रवार रात 8 बजे ईरानियों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी। ‘वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी’ की वरिष्ठ फेलो होली डैग्रेस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेशों से साफ है कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस आह्वान को गंभीरता से लिया।
डैग्रेस का कहना है कि इन प्रदर्शनों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या ईरानी जनता एक बार फिर शासन परिवर्तन के विचार की ओर बढ़ रही है। फिलहाल सरकार सख्ती के रास्ते पर है और प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे। ऐसे में आने वाले दिन ईरान के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।